DNS ( Domain Name System ) क्या है?

DNS ( Domain Name System ) क्या है?

DNS ( Domain Name System ) एक Naming system है जिसमे domain name और उसके IP Address को store किया जाता है और Client (Web Browser) के request आने पर  DNS Domain Name ( Eg: google.com ) को  IP address में बदलता है। 

DNS क्यों जरुरी है

इन्टरनेट से connected सभी device को एक unique address assign किया जाता है जिसे हम IP address कहते है (Eg: 103.57.85.83) IP address इन्टरनेट से connected सभी devices को एक दुसरे के साथ communicate करने में help करता है।  जब भी हमें कोई भी इनफार्मेशन को Internet (World Wide Web) में search करना होता है तब हम Domain Name (Eg: Microsoft.com) का उपयोग करते है जोकि याद रखने में काफी आसानी होती है। बगेर DNS के हमारे पास Domain Name उपलव्ध नही होते और हमें इनफार्मेशन को search करने के लिए Website का IP address (Eg: 103.57.85.83) का उपयोग करना परता और क्युकी हर Website का एक unique IP address होता है तोह इन्हें याद करने में काफी परेशानी होती। DNS की मदद से हमें सिर्फ Domain Name को याद करना होता है और DNS (DNS Server या Name Server) खुद उस Domain Name को IP Address में बदलता है। 

DNS कैसे काम करता है?

जब भी हम  web browser में domain name या URL type करके submit करते है:

  1. Web Browser उस domain name को operating system के पास भेजता है। 
  2. Operating System domain name को DNS Resolver को pass करता है।
  3. DNS Resolver Root Server को Domain Name का IP Address के लिए request करता है।
  4. उसके Response में Root Server Domain Name का type पता करता है और type के हिसाब से उसका address DNS Resolver को बताता है।
  5. DNS Resolver उस address के help से उस particular type के domain directory (.com, .net, .org, .in, .jp) को IP Address के लिए  request करता है। अब domain directory DNS Resolver को उस domain name का name server ( ns1.example.com, ns2.example.com ) return करता है। 
  6. DNS Resolver उस Name Server के help से Authoritative Name server को IP Address के लिए request करता है। उसके response में Authoritative Name Server DNS Resolver को उस domain name का IP Address return करता है।
  7. अब DNS Resolver IP Address को Operating System के पास भेजता है।
  8. Operating System Browser को वो IP address return करता  है।
  9. Web Browser उस IP की मदद से Web Server को HTML Content के लिए request करता है। 
  10. उसके response में Web Server content को web browser में भेजता है और website हमारे सामने खुल जाता है। 

DNS के Different Sections

DNS Records – DNS Records एक database है जिसमे domain name को उसके corresponding IP Address क साथ connect किया जाता है। 

  • A (Address Mapping)
  • AAA (IP Version 6 Address record)
  • CNAME (Canonical Name record)
  • MX (Mail exchanger record)
  • NS (Name Server records)
  • SRV (Service Location)
  • PTR (Reverse-lookup Pointer)
  • CERT (Certificate record)
  • TXT (Text Record )
  • SOA (Start of Authority)

DNS queries – DNS queries एक request है जो DNS client DNS server को भेजता है इस request का मकसद होता है domain name को IP Address में बदलना।

  • Recursive
  • Iterative
  • Non-recursive

DNS Server – ये server domain name और उसके IP address को store करता है और इसके साथ साथ ये request को accept करता है और उसके हिसाब से IP address को return करता है।

  • DNS Resolver – Resolver एक server है जो domain name को IP address में बदलता है।
  • DNS Root Server – Root Server DNS Resolver से request लेता है और उसे domain name के type के मुताबिक  domain directory का specific address देता है।
  • Domain-Specific Server – इस server में specific type के domain store रहते है।
  • Authoritative DNS Server (Authoritative Name Server) –  इस server में name server और उसके corresponding IP Address store रहता है।

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